- जानिए पानी से गैस कैसे बनेगी और ट्रेन कैसे चलेगी
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अर्चना गुप्ता: “जींद से सोनीपत हाइड्रोजन ट्रेन चला दी। न धुआं निकलेगा और न ही बिजली की तारों की जरूरत होगी। न पेट्रोल, न डीजल और न बिजली… पानी तै ट्रेन चलेगी।”
असंध से भाजपा विधायक योगेंद्र राणा: “पहले कहा जाता था कि पानी से भी कुछ चलेगा। ये नरेंद्र मोदी की गारंटी है, जिन्होंने पानी से भी ट्रेन चला दी।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई को जींद से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाने वाले हैं। यह ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच चलेगी। भाजपा नेताओं के बयानों से यह संदेश जा रहा है कि ट्रेन सीधे पानी से चलेगी, जबकि तकनीकी रूप से यह सही नहीं है। ट्रेन पानी से नहीं, बल्कि पानी की इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया से तैयार हाइड्रोजन से चलेगी। इसके लिए जींद रेलवे स्टेशन परिसर में 430 किलोग्राम प्रतिदिन क्षमता वाला हाइड्रोजन प्लांट बनाया गया है।
पहले जानिए कैसे पानी से हाइड्रोजन गैस बन रही…
प्लांट में अंडरग्राउंड पानी का इस्तेमाल किया जा रहा है। पहले पानी को शुद्ध कर इलेक्ट्रोलाइजर मशीन में भेजा जाएगा। यहां बिजली की मदद से पानी (H₂O) को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैस में अलग किया जाएगा। इस प्रक्रिया को इलेक्ट्रोलिसिस कहा जाता है। तैयार हाइड्रोजन गैस को शुद्ध कर उच्च दबाव वाले टैंकों में स्टोर किया जाएगा। इसके बाद इसी हाइड्रोजन से ट्रेन में लगे सेल में प्रेशर पाइप के जरिए डाली जाएगी, जिससे ट्रेन की मोटर चलेगी।
अब जानिए हाइड्रोजन से ट्रेन कैसे चलेगी?
ट्रेन के इंजन में हाइड्रोजन गैस को सीधे जलाया नहीं जाएगा। इसके बजाय ट्रेन में फ्यूल सेल लगा होगा। इसमें हाई प्रेशर टैंक में भरी हाइड्रोजन गैस हवा से मिलने वाली ऑक्सीजन के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया करती है। इस प्रक्रिया से बिजली पैदा होती है, जो ट्रेन के इलेक्ट्रिक मोटर को चलाती है। इस दौरान धुआं या कार्बन डाइऑक्साइड नहीं निकलती, बल्कि केवल पानी (वॉटर वेपर) और गर्मी निकलती है। यही वजह है कि हाइड्रोजन ट्रेन को पर्यावरण के अनुकूल (ग्रीन) परिवहन माना जाता है।
रेल मंत्रालय ने मंजूरी दी
रेल मंत्रालय ने शुक्रवार को भारत की पहली रोजाना चलने वाली हाइड्रोजन ट्रेन शुरू करने को मंजूरी दे दी है। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, यह ट्रेन 74010/74009 नंबर से संचालित होगी। जून में इस हाइड्रोजन ट्रेन का दिल्ली से जींद के बीच सफल ट्रायल किया गया था। ट्रायल के दौरान इमरजेंसी ब्रेकिंग दूरी, ट्रेन की स्थिरता (ऑसिलेशन) और अन्य तकनीकी मानकों की जांच की गई।
रेल मंत्रालय के अनुसार, ट्रेन जल्द परिचालन के लिए तैयार है। इसमें 1200 किलोवाट क्षमता का हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है। ट्रेन को 75 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से चलाया जाएगा।
हाइड्रोजन, डीजल और बिजली… तीनों ट्रेनों का खर्च समझिए
ट्रायल के दौरान ट्रेन ने करीब 800 ग्राम हाइड्रोजन प्रति किलोमीटर खर्च की। इसके हिसाब से एक किलोमीटर चलाने का खर्च लगभग 600 से 700 रुपए आता है। वहीं, डीजल ट्रेन एक किलोमीटर चलने में करीब डेढ़ लीटर डीजल खर्च करती है। जींद से सोनीपत तक आने-जाने का एक पूरा चक्कर लगाने में डीजल ट्रेन को करीब 300 लीटर डीजल लगता है। दूसरी ओर, बिजली से चलने वाली ट्रेन एक घंटे में करीब 4,600 यूनिट बिजली खर्च करती है।
