- नड्डा ने कहा-आपकी चिट्ठी मिली, चर्चा कर रहे
सोनम वांगचुक के अनशन का आज यानी गुरुवार को 26वां दिन है। गुरुग्राम के मेदांता हॉस्पिटल में भर्ती हुए उन्हें दो दिन हो चुके हैं। बुधवार को उनसे मिलने पहुंचे आम आदमी पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा और समाजवादी पार्टी के 15 विपक्षी सांसदों को पुलिस ने रोक दिया था।
पुलिस और सांसदों के बीच बहस हुई। नाराज सांसद गेट पर ही धरने पर बैठ गए। इसे लेकर करीब एक घंटे तक हंगामा चला। इसके बाद सोनम ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो मैसेज जारी किया, जिसमें कहा- अनशन को 25 दिन बीत गए हैं लेकिन अभी तक जिंदा हूं। कुछ सांसद मुझसे मिलने आए, उन्होंने भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की। मुझे अगर सरकार की तरफ से भरोसा मिले तो मैं आज ही अनशन खत्म करने को तैयार हूं। बस सरकार छात्रों के खिलाफ कार्रवाई न करे।
उधर, शाम को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने प्रेस कॉन्फ्रेस की और कहा कि वांगचुक ने हमें ओपन लेटर लिखा है। हम जल्दी उस लेटर का जवाब देंगे। इसके अलावा CJP के लोगों की बातें भी हमने शांति से सुनी। उन्होंने अपनी बातें लिखकर दी हैं। हम चर्चा को तैयार है। जब कहेंगे हम चर्चा करेंगे।
उधर, मंगलवार के घटनाक्रम को देखते हुए मेदांता में पुलिस ने सिक्योरिटी बढ़ा कर दी है। 600 पुलिसकर्मियों को 3 शिफ्टों में तैनात किया है। एक्जिट गेट बंद कर दिया गया है, अब एंट्री गेट से ही आना-जाना होगा। इसके अलावा बाहरी वाहनों को प्रॉपर अपॉइंटमेंट और रीज़न देने पर ही एंट्री मिलेगी।
सोनम वांगचुक ने सरकार को लिखी चिट्ठी में रखीं ये शर्तें…
वांगचुक ने चिट्ठी में सबसे पहले सरकार की ओर से पहल करने का आभार जताया। तीन मांगें रखीं, जिसमें परीक्षा पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा और जवाबदेही तय करने के लिए संसद में सार्थक चर्चा हो। चिट्ठी में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर विचार करना भी शामिल है।
सबसे खास यह कि वांगचुक ने अनशन खत्म करने की शर्त बताते हुए लिखा- 20 जुलाई को हुआ ‘चलो संसद’ मार्च पुलिस की कार्रवाई के बावजूद शांतिपूर्ण रहा। प्रदर्शनकारियों पर कोई कानूनी केस या उत्पीड़न जैसी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, इस आश्वासन के बाद वे अनशन खत्म कर देंगे।
यहां जानिए सोनम वांगचुक से मिलने पहुंचे सांसदों ने क्या-क्या कहा…
सांसद प्रिया सरोज : यूपी के मछलीशहर से सपा सांदस प्रिया सरोज ने कहा कि हम लोग बैठे रहेंगे, जब तक हमें मिलने नहीं दिया जाएगा। चाहे रात से सुबह हो जाए, हम मिलकर ही जाएंगे। हमसे पहले कई नेता आए हैं, उनको आपने जाने दिया। हमारे लिए मेडिकल प्रोटोकॉल आ गया? ये मेडिकल प्रोटोकॉल हमें भी दिखाइए। पुलिस का हम लोगों के प्रति रवैया बहुत ही गलत था।
सांसद इकरा हसन : यूपी के कैरान से सांसद इकरा हसन ने कहा कि सरकार ये चाहती है कि सोनम सर मर जाएं। बच्चे इसी तरीके से बर्बाद होते रहें। लेकिन, हम ऐसा नहीं होने देंगे। इनके सामने अनशन करने से कुछ नहीं होगा। ये अंग्रेजों से भी बुरे हैं। बिल्कुल भी इंसानियत नहीं है।
सपा सांसद राजीव राय : यूपी के घोसी से सपा सांसद राजीव राय ने कहा कि आपने उनकी (सोनम) पत्नी की बात सुनी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि हमारे पत्र को पाने के बाद आज उन्हें यह अनशन तोड़ना था। लेकिन हमें उनसे मिलने नहीं दिया गया और न ही पत्र देने दिया गया। इसका मतलब है कि कहीं न कहीं साजिश की बू आती है कि सरकार उन्हें अनशन नहीं तुड़वाना चाहती।
AAP सांसद संजय सिंह: AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंहने कहा कि वे वांगचुक से मिलने गए थे। मगर, पुलिस ने जाने नहीं दिया। सरकार वांगचुक को अनशन तोड़ने नहीं देना चाहती, उन्हें मारना चाहती है। हमने सोनम की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो को 55 सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक पत्र सौंपा। इसमें सोनम से अनशन खत्म करने की अपील की गई है।
पुलिस को चकमा देकर दो सपा नेताओं ने मेदांता में दिया धरना
बुधवार दोपहर को पुलिस सुरखा को चकमा देकर समाजवादी पार्टी के दो नेता मेदांता अस्पताल परिसर में धरने पर बैठ गए। दोनों हाथों में बैनर और तख्ती लिए थे। इनमें एक कामेश्वर उर्फ किशन दीक्षित है, जिसने 2022 में प्रधानमंत्री मोदी के खास प्रत्याशी नीलकंठ तिवारी के खिलाफ साउथ वाराणसी से विधानसभा चुनाव लड़ा था।
इस चुनाव में तिवारी की जीत हुई थी। इसकी सूचना मिलते ही गुरुग्राम सदर पुलिस एक्टिव हुई और तुरंत ही कई टीमें अस्पताल पहुंची। मगर, इससे पहले ही प्रोटेस्ट कर रहे दोनों सपा नेता अपने बैनर लेकर वहां से खिसक लिए।
गुरुग्राम में कांग्रेस नेताओं को किया गया हाउस अरेस्ट
सोनम वांगचुक के गुरुग्राम शिफ्ट होने का असर स्थानीय राजनीति पर भी दिखने लगा है। वांगचुक के समर्थन में कांग्रेस नेताओं के प्रदर्शन या उनसे मुलाकात की आशंका को देखते हुए पुलिस ने देर रात बड़ी कार्रवाई की। कांग्रेस के शहरी जिलाध्यक्ष पंकज डावर समेत 10 से अधिक वरिष्ठ नेताओं को उनके घरों में ही नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर दिया गया।
पुलिस ने इन सभी नेताओं को लिखित नोटिस जारी कर कानून-व्यवस्था बनाए रखने और मेदांता हॉस्पिटल की ओर मार्च या प्रदर्शन नहीं करने की सख्त हिदायत दी है।
