- भाषा पर नियंत्रण जरूरी, पार्टी को सब दिखता है
भिवानी के बवानीखेड़ा में हिसार सांसद जयप्रकाश व पूर्व सीपीएस रामकिशन फौजी के बीच शुरू हुई जुबानी जंग में पूर्व सांसद बृजेंद्र भी कूद पड़े हैं। भिवानी में पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह ने सांसद जयप्रकाश व पूर्व सीपीएस रामकिशन फौजी की बयानबाजी को लेकर कहा कि बयानबाजी भले ही हो, लेकिन भाषा का नियंत्रण होना चाहिए।
भाषा का स्तर सभ्यता के दायरे से बाहर नहीं जाना चाहिए। पार्टी को सब दिखता है, कोई ऐसी चीज नहीं हैं, जिसका संज्ञान ना हो। बयानबाजी समाचारों में चर्चित रही है। इसमें कोई छुपाने व दबाने वाली नहीं हैं, लेकिन भाषा पर नियंत्रण होना जरूरी है। भाषा ही वह चीज है, जो सारी चीजें बिगाड़ती हैं।
मामले में दोनों ही गलत
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष द्वारा इस विवाद की जानकारी नहीं होने की बात पर बृजेंद्र सिंह ने कहा कि जब डायरेक्ट यह सवाल पूछेंगे कि कार्रवाई क्या करेंगे, तो उस मामले में आदमी को सतर्क रहना चाहिए। इस बयानबाजी को लेकर पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह ने कहा कि इस मामले में दोनों ही गलत है। दोनों की भाषा मर्यादित नहीं थी, लेकिन पहली जिम्मेदारी उसकी होती है, जो शुरू करता है।
उसके बाद फिर उसका जवाब क्या दिया जाता है, वह बाद की बात हो जाती है।
जयप्रकाश और रामकिशन फौजी में विवाद
बता दें कि भिवानी के बवानीखेड़ा हलके में कार्यक्रम के दौरान सांसद दीपेंद्र हुड्डा की मौजूदगी में हिसार सांसद जयप्रकाश जेपी ने पूर्व मुख्य संसदीय सचिव (CPS) रामकिशन फौजी को पीठ में छुरा घोंपने वाला बता दिया। इस कार्यक्रम में फौजी मौजूद नहीं थे। साल 2024 में कांग्रेस ने रामकिशन फौजी का टिकट काटकर प्रदीप नरवाल को प्रत्याशी बनाया था।
हालांकि नरवाल चुनाव हार गए। इसी हार को लेकर जेपी ने फौजी पर निशाना साधा। जेपी का बयान सामने आने का बाद फौजी ने भी पलटवार किया। जिसमें सांसद के लिए काली भेड़, गद्दार जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। यहां तक कहा कि पूर्व सीएम बंसीलाल तो जेपी को चंबल की घाटी का डाकू कहते थे।
