हरियाणा के अंबाला नगर निगम में इन दिनों प्रशासनिक और निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच गहरा विवाद छिड़ गया है। भाजपा की निर्वाचित मेयर शैलजा संदीप सचदेवा और निगम कमिश्नर वीरेंद्र लाठर के बीच छिड़ी यह जंग अब कानूनी दहलीज तक पहुँच चुकी है। मेयर ने प्रोटोकॉल के उल्लंघन और पद की गरिमा को ठेस पहुँचाने के आरोप में निगम कमिश्नर को 5 करोड़ रुपये का मानहानि का कानूनी नोटिस थमा दिया है।

विवाद का मुख्य कारण प्रोटोकॉल का पालन न करना और निर्वाचित महापौर को दरकिनार करना बताया जा रहा है। मेयर का आरोप है कि शहर में होने वाले विभिन्न विकास कार्यों के शिलान्यास और उद्घाटन कार्यक्रमों में उनके नाम को शिलापट्टों (नेमप्लेट्स) से गायब किया जा रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि निगम कमिश्नर जानबूझकर लोकतांत्रिक परंपराओं को ताक पर रखकर एक पराजित विधायक से सरकारी परियोजनाओं का उद्घाटन करवा रहे हैं, जो न केवल कानून के खिलाफ है बल्कि उनके संवैधानिक पद का अपमान भी है।

मेयर शैलजा सचदेवा के अनुसार, कमिश्नर की कार्यप्रणाली के कारण पिछले 10 महीनों से नगर निगम की कोई अहम बैठक नहीं बुलाई गई है। इस प्रशासनिक सुस्ती का खामियाजा शहर की जनता को भुगतना पड़ रहा है। बैठकों के अभाव में 54 अवैध कॉलोनियों को वैध करने की प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है और केंद्र सरकार द्वारा टैक्स कम करने के फैसलों पर भी कोई चर्चा नहीं हो पा रही है। इसके अतिरिक्त, सफाई व्यवस्था, डॉग शेल्टर और नंदीशाला जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे भी ठंडे बस्ते में चले गए हैं।

मेयर के पति और मनोनीत पार्षद संदीप सचदेवा ने भी कमिश्नर वीरेंद्र लाठर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि दर्जनों पत्र लिखने के बावजूद कमिश्नर की ओर से कोई उत्तर नहीं दिया गया, जिससे यह प्रतीत होता है कि वह अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं। फिलहाल कमिश्नर वीरेंद्र लाठर अवकाश पर हैं और अपनी सेवानिवृत्ति के करीब हैं। मेयर द्वारा भेजे गए इस नोटिस में उन्हें 15 दिनों का समय दिया गया है। यदि निर्धारित समय के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो मेयर ने मामले को अदालत में ले जाने की चेतावनी दी है।

नगर निगम चुनावों की आहट के बीच प्रशासन और सियासत का यह सीधा टकराव अंबाला की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि क्या कमिश्नर इस भारी-भरकम नोटिस का जवाब देते हैं या यह विवाद सेवानिवृत्ति के बाद उनके लिए अदालती चक्करों का कारण बनता है। फिलहाल, इस खींचतान ने शहर के विकास कार्यों की गति पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।