समालखा: हरियाणा में फिरौती और गोलीबारी की बढ़ती घटनाओं ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। रोहतक के सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने समालखा में एक व्यापारी परिवार से मुलाकात कर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। हाल ही में समालखा की गुड़मंडी में एक हलवाई से एक करोड़ रुपये की फिरौती मांगने की घटना के बाद, पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचे सांसद ने सीधे तौर पर नायब सैनी सरकार को कटघरे में खड़ा किया।
सांसद हुड्डा ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि आज हरियाणा में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और अपराधी ‘होम डिलीवरी मोड’ पर काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, प्रदेश की जनता अब सुरक्षित महसूस नहीं कर रही है और अपराधी बिना किसी डर के लोगों के घरों तक फिरौती की मांग पहुंचा रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि हरियाणा की बागडोर चंडीगढ़ से नहीं, बल्कि दिल्ली से रिमोट कंट्रोल के जरिए संचालित की जा रही है, जिसके कारण स्थानीय प्रशासन पंगु हो गया है।
केंद्रीय एजेंसियों और नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों का हवाला देते हुए सांसद ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से हरियाणा अपराध दर में देश के अग्रणी राज्यों में शुमार हो गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में फिरौती, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले चिंताजनक रूप से बढ़े हैं। हुड्डा ने चेतावनी दी कि आज हरियाणा में 80 से अधिक संगठित आपराधिक गिरोह सक्रिय हैं, जो खुलेआम वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल की तुलना करते हुए दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि एक समय था जब अपराधी हरियाणा की सीमा लांघने की हिम्मत नहीं करते थे और प्रदेश छोड़कर भाग जाते थे। इसके विपरीत, वर्तमान में उत्तर प्रदेश के बदमाशों ने हरियाणा को अपना नया ठिकाना बना लिया है। इस बिगड़ते माहौल के कारण राज्य के व्यापारी, डॉक्टर और उद्योगपति सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं और कई लोग प्रदेश से पलायन करने पर विचार कर रहे हैं।
सांसद ने आश्वासन दिया कि कांग्रेस पार्टी पूरी मजबूती के साथ पीड़ित व्यापारियों के साथ खड़ी है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से अपराधियों पर कठोरतम कार्रवाई की मांग की ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए। दीपेंद्र हुड्डा ने स्पष्ट किया कि 28 तारीख से शुरू हो रहे संसद सत्र में वे हरियाणा की इस बदहाल कानून-व्यवस्था का मुद्दा प्रमुखता से उठाएंगे। साथ ही, आगामी विधानसभा सत्र में भी इस विषय पर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की गई है।
