• बोले-पैरवी मजबूत नहीं की तो आंदोलन करेंगे, बीजेपी कॉलोनी काटने पर जुटी

सिरसा जिले के रानियां से इनेलो विधायक अर्जुन चौटाला ने चौधरी देवीलाल यूनिवर्सिटी (CDLU) की जमीन विवाद मामले में बीजेपी सरकार को घेरा और आरोप लगाया कि सरकार यूनिवर्सिटी की जमीन को भू-माफिया को बेचना चाहती है।

विधायक अर्जुन चौटाला ने कहा, सरकार एक्शन लेने का काम करे और यूनिवर्सिटी प्रशासन हाई कोर्ट में अपनी मजबूत पैरवी करे, ताकि जमीन को बचाया जा सके। अगर सरकार ने एक्शन नहीं लिया तो इनेलो आंदोलन करेगी।

आज वीरवार को डबवाली रोड स्थित इनेलो पार्टी कार्यालय में विधायक अर्जुन चौटाला समर्थकों से मिले और मीडिया से रूबरू हुए।

 

मुख्यमंत्री रहते जमीन नाम कर स्थापित की थी

विधायक अर्जुन बोले, यूनिवर्सिटी की 52 एकड़ जमीन पर भू-माफिया सरकार के साथ मिलकर कब्जा करने की कोशिश में हैं। यह जमीन शहर के बीचों-बीच है और इसकी प्रति एकड़ 20 करोड रुपए तक कीमत है।

साल 2003 में स्व. चौ. ओमप्रकाश चौटाला ने मुख्यमंत्री रहते हुए सीडीएलयू के अंतर्गत आने वाली पूरी जमीन को यूनिवर्सिटी के नाम पर इसे स्थापित किया था।

भविष्य को देखते हुए उस समय की मांग पर ज्यादा जमीन दी गई थी, ताकि एजुकेशन में समय-समय की मांग पर नए कॉलेज, ग्राउंड, हॉस्टल व अन्य सुविधाएं आती रहती है, जिन्हें बनाने की जगह की कमी न रहे। इसी का परिणाम है कि मेडिकल कॉलेज भी इसी की जमीन पर बन रहा है।

 

भाजपा सीडीएलयू को कमजोर करना चाहती

विधायक अर्जुन बोले, दुर्भाग्य की बात है कि भाजपा सरकार के कई लोग भू-माफिया को साथ लेकर सीडीएलयू को कमजोर करना चाहते हैं। ये यूनिवर्सिटी की जमीन है और इसे एजुकेशन के लिए इस्तेमाल किया जाए।

इस 52 एकड़ जमीन पर भू-माफिया के साथ मिलकर कोर्ट में जाकर इस जमीन को हथियाने की काेशिश कर रहे हैं। सरकार की ओर से ये कोशिश की जानी थी कि ये जमीन यूनिवर्सिटी के पास ही रहे। उनको कोर्ट में केस को मजबूती से लड़ना चाहिए।

 

नए कॉलेज सरकार कहां बनाएगी :विधायक

विधायक अर्जुन बोले, नए कॉलेज सरकार कहां बनाएगी, क्या शहर से बाहर जमीन खरीदेगी? बच्चों को पढ़ने के लिए क्या बाहर भेजेंगे? अगर कॉलोनी काटनी है तो वह बाहर काटो और सरकार भू-माफिया को बाहर वाली जमीन दे, ताकि पढ़ने वाले परेशान न हो।

पहले एग्रीमेंट कर लिया था : अर्जुन

रानियां विधायक बोले, सरकार लगातार हमारी यूनिवर्सिटी को कमजोर किया है। मुंजारे खेती करते थे। जब वो जमीन एक्वायर की थी तो ये जमीन एक्वायर कर ली थी और यूनिवर्सिटी के नाम है। कब्जा इसीलिए दिया गया था कि जरूरत पड़ी तो ले ली जाएगी। यूनिवर्सिटी खरीद पहले ही कर चुकी है।

अगर पहले कोई एग्रीमेंट साइन कर लिया तो बाद में जो हुआ, उस पर मामला कोर्ट में चला गया। इसी सरकार में सबसे ज्यादा अप्रुव कॉलोनियां काटी है।

 

अफसर बिना पूछे ये निजीकरण कैसे कर सकता है? इनको गालियां पड़ी है : अर्जुन

बिजली निजीकरण मामले में विधायक अर्जुन बोले, निजीकरण का कानून आ गया और बिजली मंत्री को पता नहीं है। कोई भी कानून सरकार या मंत्री के बिना नहीं आ सकती। आपका अफसर बिना पूछे ये निजीकरण कैसे कर सकता है?

अब पता चल गया तो मुख्यमंत्री एवं मंत्री कह रहे हैं कि समाधान करेंगे। इनको लोगों से गालियां पड़ी है। ये कुछ और ही चीज है। बिजली के निजीकरण का टेंडर हजारों करोड़ रुपए में जाता है। इन्होंने इसमें कितना कमीशन खाया होगा। ये मेरे कहने की बात नहीं है। इनके खुद के मंत्री ने कहा है कि कोई गारंटी नहीं है, ये तो पैसे खाते हैं।

बिजली का निजीकरण केवल अपने साथियों व उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए किया है। इस प्राइवेट कंपनी और मालिक से पता चला जाएगा कि इसके पीछे क्या साजिश है।