• दुनिया इजराइल से दूर जा रही, भारत पास

कांग्रेस सांसद सोनिया गांधी ने गाजा में इजराइल की सैन्य कार्रवाई पर मोदी सरकार के स्टैंड पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा, ‘संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की जून 2026 की रिपोर्ट बताती है कि इजराइल गाजा में फिलिस्तीनियों के अस्तित्व को खत्म करने के इरादे से बच्चों को निशाना बना रहा है। इतनी गंभीर रिपोर्ट आने के बाद भी मोदी सरकार चुप है।’

सोनिया ने लिखा कि इस आयोग की अगुआई अब भारत के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एस. मुरलीधर कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में जारी 94 पन्नों की रिपोर्ट में कहा गया है कि इजराइल की कार्रवाई का मकसद गाजा में फिलिस्तीनियों के अस्तित्व को खत्म करना है और इसके लिए बच्चों को निशाना बनाया जा रहा है।

सोनिया बोलीं- रिपोर्ट में बच्चों पर हमलों के बड़े दावे
गाजा में अब तक कम से कम 20 हजार बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 44 हजार बच्चे घायल हुए हैं। इनमें से कई बच्चे पूरी जिंदगी के लिए विकलांग या गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। बच्चों को निशाना बनाना कोई आकस्मिक घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित रणनीति है।
गाजा में मारे गए या घायल लोगों में 27% बच्चे हैं। कई लड़कों के सिर और गर्दन में गोली लगने के निशान मिले। गाजा के 97% स्कूल तबाह हो चुके हैं। बच्चों के अस्पतालों समेत स्वास्थ्य व्यवस्था भी नष्ट कर दी गई है। इसके कारण गर्भपात और प्रसव संबंधी जटिलताओं में 300% तक बढ़ोतरी हुई है।
करीब ढाई साल पहले हमास ने इजराइल पर जो हमला किया था, वह बेहद भयावह, जघन्य और पूरी तरह अस्वीकार्य था। लेकिन इसके बाद इजराइली सेना और राजनीतिक नेतृत्व की जवाबी कार्रवाई अंधाधुंध क्रूरता और बर्बरता से भरी रही।

सोनिया बोलीं- भारत अकेली आवाज, जिसने चुप्पी साधी

सोनिया गांधी ने कहा कि जब पूरी दुनिया में इजराइल के खिलाफ विरोध बढ़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय गाजा में हुई तबाही को गंभीरता से देख रहा है, तब भारत सरकार अकेली ऐसी आवाज बन गई है, जिसने चुप्पी साध रखी है। उन्होंने कहा कि जस्टिस एस. मुरलीधर की रिपोर्ट पर भी मोदी सरकार ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

उन्होंने अपने लेख में जस्टिस मुरलीधर के दिल्ली हाईकोर्ट से तबादले का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि उनका तबादला उस समय हुआ था, जब उन्होंने 2020 के दिल्ली दंगों से पहले BJP नेताओं के कथित भड़काऊ बयानों पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए थे।

सोनिया गांधी ने कहा कि भारत कभी उपनिवेशवाद के खिलाफ एक मजबूत आवाज था। देश राष्ट्रीय संप्रभुता, अंतरराष्ट्रीय शांति और विकासशील देशों के साथ एकजुटता की नीति के लिए जाना जाता था। लेकिन आज भारत वैश्विक नियमों के खुले उल्लंघन, ग्लोबल साउथ के लोगों की पीड़ा और गाजा व पश्चिमी तट में मानव गरिमा पर हो रहे हमलों के प्रति उदासीन दिखाई दे रहा है।

सोनिया बोलीं- इजराइल को अमेरिका का सपोर्ट

सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि इजराइल के ऐसे बयानों के बावजूद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सरकार के समर्थन ने इजराइल को अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखने का मौका दिया। हालांकि दुनिया के बाकी देशों का जमीर जागा है और अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजराइल की कार्रवाई के खिलाफ आवाज तेज होती जा रही है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका के विरोध की वजह से संयुक्त राष्ट्र कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सका, लेकिन उसकी एजेंसियों ने इजराइल के कथित युद्ध अपराधों का डिटेल डॉक्यूमेंटेशन किया। उन्होंने लिखा कि फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे पश्चिमी देशों ने दशकों की उदासीनता के बाद फिलिस्तीन को मान्यता दी है।

सोनिया गांधी ने कहा कि भारत के पुराने सहयोगी दक्षिण अफ्रीका ने 1948 के नरसंहार सम्मेलन के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए इजराइल के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में मामला दायर किया। कई यूरोपीय देशों ने इजराइल को हथियारों की बिक्री पर रोक या प्रतिबंध लगाए। कई लैटिन अमेरिकी देशों ने इजराइल से अपने कूटनीतिक संबंध घटा दिए या खत्म कर दिए।