• AAP, TMC और उद्धव गुट के सांसदों को मिल सकता है मौका

मोदी सरकार की केंद्रीय मंत्रिमंडल की आज मीटिंग होनी है। यह मीटिंग इसलिए भी अहम है क्योंकि एक दिन पहले दो हलचल देखने को मिली थीं। दरअसल मंगलवार सुबह केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उनका राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो गया था और भाजपा ने उन्हें दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा।

कुरियन अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री थे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इस बीच शाम का राष्ट्रपति भवन में पद्म पुरस्कार समारोह के बाद पीएम ने राष्ट्रपति से मुलाकात की।

ऐसे में चर्चा है कि केंद्र सरकार जल्द ही कैबिनेट में फेरबदल कर सकती है। इस बार AAP, TMC और उद्धव गुट से आए सांसदों को मौका मिल सकता है।

दो मंत्रियों को दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा गया

भाजपा ने हालिया राज्यसभा चुनाव में केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया। जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल 21 जून को समाप्त हुआ और उन्होंने मंत्री पद छोड़ दिया।

रवनीत सिंह बिट्टू का कार्यकाल भी खत्म हो गया है, लेकिन उन्होंने अभी इस्तीफा नहीं दिया है। नियमों के अनुसार बिट्टू छह महीने तक सांसद बने बिना मंत्री रह सकते हैं।

रवनीत सिंह बिट्टू ने संकेत दिए हैं कि वह पंजाब की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं। उन्होंने कहा है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में वह चुनाव लड़ सकते हैं और पंजाब में काम करना चाहते हैं।

‘एक व्यक्ति-एक पद’ फॉर्मूले का असर

भाजपा के भीतर ‘वन मैन, वन पोस्ट’ सिद्धांत भी फेरबदल की वजह माना जा रहा है। हर्ष मल्होत्रा को हाल ही में दिल्ली भाजपा अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि वे केंद्र में मंत्री भी हैं। पंकज चौधरी उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हैं और वित्त राज्य मंत्री भी। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि संगठनात्मक जिम्मेदारी मिलने के बाद इन नेताओं को मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है।

1. दल बदलकर आए नेताओं को जगह देना

  • हाल के महीनों में कई विपक्षी नेता और सांसद एनडीए के करीब आए हैं। इनमें आम आदमी पार्टी से जुड़े 7 सांसद हैं। जिनमें राघव चड्ढा भी शामिल हैं।
  • TMC के 28 में से 20 लोकसभा सांसद त्रिपुरा की नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी (NCPI) में विलय कर चुके हैं। इन सांसदों ने NDA को समर्थन देने की बात कही है।
  • उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) छोड़कर शिंदे गुट में गए 6 सांसद भी शामिल हैं। ऐसे नेताओं को सरकार या संगठन में भूमिका मिलने की चर्चा है।

2. संसद में दो-तिहाई बहुमत का गणित

भाजपा और एनडीए संसद में अपनी संख्या और मजबूत करना चाहते हैं। माना जा रहा है कि भविष्य में कुछ संवैधानिक संशोधनों के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। इसलिए नए सहयोगियों और समर्थक सांसदों को साथ रखना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

3. पंजाब और उत्तर प्रदेश चुनाव

अगले साल पंजाब और उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में भाजपा क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर मंत्रिमंडल में बदलाव कर सकती है।