• यह बढ़ोतरी किसानों से मजाक, जमीदारों के साथ अन्याय

गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में सरकार की ओर से मात्र 25 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी पर सिरसा की सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। सांसद सैलजा ने कहा कि सरकार ने रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए गेहूं का एमएसपी 2,585 रुपए से बढ़ाकर 2,610 रुपए प्रति क्विंटल किया है।

यह वृद्धि एक प्रतिशत से भी कम है, जबकि खेती की लागत और किसानों के रोजमर्रा के खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के वादे के साथ सत्ता में आई थी और फसल का एक-एक दाना खरीदने एवं लागत पर लाभकारी मूल्य देने की बातें करती रही है। मगर इसी तरह जौं और अन्य फसलों की एमएसपी में बहुत कम बढ़ोतरी की है।

किसान को केवल गेहूं का भाव नहीं देखना होता

सैलजा ने कहा कि सरकार के अपने आंकड़ों के अनुसार गेहूं की उत्पादन लागत 1,264 रुपए प्रति क्विंटल आंकी गई है और एमएसपी 2,610 रुपए निर्धारित किया गया है। किसान को केवल गेहूं का भाव नहीं देखना होता, बल्कि बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी, मशीनरी, डीजल और बिजली सहित खेती की अनेक लागतों का सामना करना पड़ता है।

सरकार स्वयं अपनी लागत गणना में इन मदों को शामिल करती है। ऐसे में किसानों के सामने यह सवाल स्वाभाविक है कि उनकी वास्तविक लागत और घरेलू खर्च बढ़ने के बावजूद एमएसपी में इतनी कम वृद्धि क्यों की गई। इसका किसानों में रोष का माहौल है और सरकार पर तंज कसते हुए महंगाई के हिसाब से एमएसपी में बढ़ोतरी की मांग की है। इसे मजाक बताया है।

‘नमी के नाम पर किसानों को किया जा रहा परेशान’

धान खरीद एवं किसानों के मुद्दे पर कुमारी सैलजा ने कहा कि खरीद के समय नमी के नाम पर किसानों को परेशान किए जाने की शिकायतें लगातार सामने आती है। गुणवत्ता और नमी के निर्धारित सरकारी मानकों का पालन होना चाहिए, ताकि अनावश्यक कटौती या परेशानी का सामना न करना पड़े। हरियाणा की सरकारी खरीद व्यवस्था में एफएक्यू मानकों के अनुसार धान की नमी की जांच के लिए नमी मीटर का प्रावधान है।

आय-लागत के अंतर को खत्म करना सरकार की जिम्मेदारी

कुमारी सैलजा ने कहा कि किसानों से किए गए वादों और जमीन पर उनकी आय एवं लागत की वास्तविक स्थिति के बीच अंतर को दूर करना सरकार की जिम्मेदारी है। किसान को केवल घोषणाओं की नहीं, बल्कि ऐसी कृषि नीति की जरूरत है, जिसमें उसकी बढ़ती लागत, मेहनत और जोखिम का उचित मूल्य मिले।

सांसद ने केंद्र सरकार से गेहूं सहित सभी फसलों के एमएसपी और खरीद व्यवस्था की समीक्षा कर किसानों को वास्तविक रूप से लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने की मांग की।