• ग्राम पंचायतें विरोध में प्रस्ताव पारित करें

कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं सिरसा लोकसभा क्षेत्र से सांसद कुमारी सैलजा आज फतेहाबाद जिले के भट्‌टू क्षेत्र के दौरे पर रही। वह लोकसभा चुनाव में जीतने के बाद पहली बार भट्‌टू क्षेत्र में पहुंची। उनके साथ विधायक बलवान दौलतपुरिया, पूर्व सीपीएस प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा, जिलाध्यक्ष अरविंद शर्मा समेत कई पदाधिकारी व कार्यकर्ता रहे।

गांव बनगांव में पंचायत-स्तरीय कार्यक्रम में कुमारी सैलजा ने कहा कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि ग्रामीण भारत के करोड़ों परिवारों के लिए जीवनरेखा है। केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के स्वरूप में किए जा रहे बदलाव ग्रामीण मजदूरों के काम मांगने के कानूनी अधिकार, न्यूनतम मजदूरी की गारंटी और ग्राम पंचायतों की भूमिका को कमजोर कर रहे हैं।

 

मनरेगा ने करोड़ों परिवारों को आर्थिक सहारा दिया

उन्होंने कहा कि डिजिटल सत्यापन की जटिलताएं, भुगतान प्रणाली में देरी, बजट में अपेक्षित वृद्धि का अभाव और प्रशासनिक नियंत्रण का केंद्रीकरण मनरेगा की मूल भावना के विपरीत है। कोरोना महामारी जैसे कठिन समय में मनरेगा ने करोड़ों परिवारों को आर्थिक सहारा दिया था, लेकिन आज उसी योजना को कमजोर किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पहले ग्राम पंचायतों को अपने गांव के विकास कार्यों की योजना बनाने और मजदूरों को काम देने का अधिकार था, परंतु अब निर्णय ऊपर से थोपे जा रहे हैं, जिससे पंचायतों की स्वायत्तता समाप्त हो रही है और स्थानीय जरूरतों की अनदेखी हो रही है।

कांग्रेस की मांग, मनरेगा में बदलाव वापस लिए जाएं

सैलजा ने कहा कि कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि काम की कानूनी गारंटी को पूर्ण रूप से बहाल किया जाना चाहिए, मनरेगा में किए गए प्रतिकूल बदलावों को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। मजदूरों को समय पर और सम्मानजनक न्यूनतम मजदूरी दी जानी चाहिए तथा ग्राम पंचायतों के अधिकारों को पुन: स्थापित किया जाना चाहिए।

ग्राम सभाओं से प्रस्ताव पारित करने की मांग की

कुमारी सैलजा ने ग्राम सभा से आह्वान किया कि वे मनरेगा की रक्षा के लिए प्रस्ताव पारित करें और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा हेतु एकजुट रहें। यह लड़ाई केवल एक योजना की नहीं, बल्कि काम के अधिकार और ग्रामीण सम्मान की लड़ाई है।