• BJP ने संजय भाटिया को राज्यसभा भेजा
  • लोकसभा चुनाव की नाराजगी-आदमपुर में मिली हार बनी कारण

हरियाणा में कुलदीप बिश्नोई की राजनीति को झटका लगा है। भाजपा ने इस बार भी राज्यसभा के लिए उनके स्थान पर पूर्व सांसद संजय भाटिया को राज्यसभा भेजने के लिए चयन कर लिया है। कुलदीप ने अगस्त 2022 को भाजपा का दामन थामा था। पार्टी में साढ़े 3 साल गुजारने के बाद भी वह पद से दूर हैं।

भाजपा के पैनल में कुलदीप बिश्नोई और संजय भाटिया दोनों के नाम थे। मगर पार्टी ने ऐसे नेता का चयन किया जो पार्टी के लिए समर्पित रहा, जबकि कुलदीप बिश्नोई को भाजपा से नाराजगी महंगी पड़ी। लोकसभा चुनाव में करनाल सीट से संजय भाटिया का टिकट काटकर मनोहर लाल को दे दिया था।

संजय भाटिया रिकॉर्ड तोड़ वोटों से जीते थे मगर पार्टी के लिए उन्होंने अपनी राजनीति को दांव पर रखा। टिकट कटने के बाद भी वह पार्टी के लिए काम करते रहे। उधर, कुलदीप बिश्नोई टिकट कटने के बाद नाराज हो गए और चुनाव के बीच नाराज हो गए। लोकसभा चुनाव में भाजपा आदमपुर से हार गई। ऐसे में पार्टी ने दोनों में से किसी का एक चयन करते समय इन सब बातों का ध्यान रखा और समर्पित नेता का चयन किया।

17 साल से पद से दूर बिश्नोई परिवार

हरियाणा में बिश्नोई परिवार 17 साल से सरकार में पद से बाहर है। 2005 से 2008 तक भजनलाल के बड़े बेटे चंद्रमोहन बिश्नोई हरियाणा के डिप्टी सीएम पद पर रहे। इसके बाद निजी कारणों से उन्होंने त्यागपत्र दे दिया। इसके बाद से आज तक बिश्नोई परिवार को सरकार में कोई पद नहीं मिला है।

2005 में भजनलाल की अगुवाई में कांग्रेस हरियाणा में पूर्ण बहुमत से आई मगर भजनलाल को मुख्यमंत्री न बनाकर कांग्रेस ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा को मुख्यमंत्री की कुर्सी दे दी। डैमेज कंट्रोल के लिए कांग्रेस ने चंद्रमोहन को डिप्टी सीएम का पद दे दिया था। इसके बाद से ही सरकार में बिश्नोई परिवार की कोई भागीदारी नहीं रही।

चुनाव से पहले सीएम मनाने घर गए थे

हरियाणा में विधानसभा चुनाव से पहले लोकसभा चुनाव हुए थे। कुलदीप बिश्नोई हिसार से टिकट मांग रहे थे। टिकट न मिलने के बाद वह नाराज हो गए। उन्होंने पार्टी के कार्यक्रमों से भी दूरी बना ली थी। कुलदीप बिश्नोई की नाराजगी दूर करने के लिए खुद मुख्यमंत्री नायब सैनी दिल्ली में कुलदीप बिश्नोई को मनाने पहुंचे।

इसके बाद कुलदीप बिश्नोई भाजपा के कार्यक्रमों में नजर आने लगे। मगर भाजपा की लोकसभा के उम्मीदवार रणजीत चौटाला को वह आदमपुर से जीतवा नहीं पाए थे। वहीं विधानसभा चुनाव में भी 57 साल बाद बिश्नोई परिवार आदमपुर से हार से गया था।