• SIR विवाद पर फतेहाबाद चेयरपर्सन का कांग्रेस पर पलटवार

जिला परिषद फतेहाबाद की चेयरपर्सन एवं भाजपा जिला उपाध्यक्ष एडवोकेट सुमन सुभाष खीचड़ ने कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के हालिया सर्वसम्मत स्पष्टीकरण ने SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कांग्रेस द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लंबे समय से चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। लेकिन अब चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त एवं दोनों चुनाव आयुक्तों की बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में स्पष्ट किया गया है कि SIR सहित प्रमुख निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग के अनुसार 24 जून 2025 के मूल आदेश से लेकर विभिन्न चरणों की समय-सारणी तक निर्णय पूरे आयोग की सहमति से लिए गए।

आपके पास कोई दस्तावेज है, तो उसे सार्वजनिक कीजिए

उन्होंने राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि, देश आपके आरोप सुन चुका है। अब देश प्रमाण देखना चाहता है। यदि चुनाव आयोग के सर्वसम्मत निर्णय के विपरीत आपके पास कोई दस्तावेज है, तो उसे सार्वजनिक कीजिए। लोकतंत्र में आरोप लगाना आसान है, लेकिन आरोप को प्रमाणित करना जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस यदि चुनाव आयोग के भीतर मतभेद का दावा करती है तो उसे यह बताना चाहिए कि कौन-सा चुनाव आयुक्त किस निर्णय से असहमत था, किस बैठक में असहमति दर्ज हुई और उसका आधिकारिक रिकॉर्ड कहां है। “यदि प्रमाण है तो सामने रखिए। यदि प्रमाण नहीं है तो देश के सामने यह सवाल रहेगा कि इतनी गंभीर बातें किस आधार पर कही गईं?”

एडवोकेट सुमन खीचड़ ने कहा कि कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र को लेकर भी कांग्रेस द्वारा राजनीतिक सवाल खड़े किए गए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह पत्र किसी चुनावी नीति अथवा SIR से संबंधित नहीं था, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी से जुड़े प्रशासनिक विषय तक सीमित था। “यदि आपके पास कोई ऐसा दस्तावेज है जो चुनाव आयोग की इस व्याख्या को गलत साबित करता है, तो उसे देश के सामने रखिए।

‘कांग्रेस बताए कि फार्म-6 में कौन-सा नियम गलत है’

यदि ऐसा कोई प्रमाण नहीं है, तो फिर इस प्रशासनिक पत्र को SIR और कथित नीतिगत मतभेद से जोड़ने का आधार क्या था? उन्होंने कहा कि किसी पत्र को उसके पूरे संदर्भ से अलग करके राजनीतिक कहानी बनाना और फिर उसके आधार पर संवैधानिक संस्था पर सवाल उठाना जिम्मेदार राजनीति नहीं हो सकती।

एडवोकेट सुमन खीचड़ ने कहा कि फार्म-6 को लेकर भी कांग्रेस द्वारा जनता के बीच सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग के अनुसार SIR से जुड़े फार्म-6 के घोषणा-पत्र को सर्वोच्च न्यायालय ने वैध माना है और गैर-SIR अवधि में पूर्व निर्धारित नियमों के अनुसार प्रक्रिया लागू रहती है।

“कांग्रेस बताए कि फार्म-6 में कौन-सा नियम गलत है? कौन-सा प्रावधान गलत है? किस प्रक्रिया पर उसकी आपत्ति है? केवल भ्रम पैदा करने से कानून और नियम नहीं बदल जाते। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से जुड़ा विषय करोड़ों नागरिकों के अधिकार से जुड़ा है और इस पर राजनीति के बजाय स्पष्ट तथ्य जनता के सामने आने चाहिए।