- कांग्रेस ने कर्मवीर सिंह बौद्ध को राज्यसभा प्रत्याशी बनाया
कांग्रेस ने कर्मवीर सिंह बौद्ध को राज्यसभा प्रत्याशी बनाया है। यह उनका पहला चुनाव होगा। बीजेपी कैंडिडेट नामांकन भरने के बाद बौद्ध ने भी विधानसभा भवन पहुंचकर अपना नामांकन किया। उनके साथ पूर्व सीएम भूपेंद्र सहित कांग्रेस के 34 विधायक मौजूद रहे। इससे पहले कांग्रेस ऑफिस में कर्मवीर बौद्ध ने नामांकन पत्र भरा। बताया जा रहा है कि हरियाणा के एक सीनियर आईएएस उन्हें पार्टी हाईकमान तक पहुंचाया। इसके बाद राहुल गांधी ने उनका नाम हरियाणा से राज्यसभा सदस्य के लिए सुझाया।
जानिये कौन हैं कर्मवीर बौद्ध…
एडीओ के पद से रिटायर हुए, पत्नी लेबर डिपार्टमेंट में तैनात
कर्मबीर बौद्ध हरियाणा के अंबाला के रहने वाले हैं। वे हरियाणा सिविल सचिवालय से करीब 4 साल पहले प्रशासनिक अधिकारी (एडीओ) के पद से सेवानिवृत्त हुए। इनकी पत्नी लेबर डिपार्टमेंट में असिस्टेंट हैं। कर्मवीर, सचिवालय में खरीद-फरोख्त को देखते थे और केयरटेकर रहे।
सस्पेंड हुए तो बिना प्रमोशन ही रिटायर हुए
कर्मबीर बौद्ध हरियाणा सिविल सचिवालय से करीब 4 साल पहले एडीओ के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। कर्मवीर सचिवालय में खरीद-फरोख्त को देखते थे, केयरटेकर थे। एक बार कुछ पंगा पड़ गया। आरोप-प्रत्यारोप लगे तो फिर कथित तौर पर स्टोर में आग लगी गई। इसके बाद तत्कालीन चीफ सेक्रेटरी ने इनको सस्पेंड कर दिया था। इसके बाद आगे कोई प्रमोशन नहीं हुआ और ये एडीओ के पद से ही सेवानिवृत्त हो गए।
किभी गुट या खेमें से जुड़ाव नहीं, इसलिए प्रबल दावेदार
कर्मवीर सिंह बौद्ध कांग्रेस में किसी भी गुट या खेमे से जुड़े हुए नेता नहीं माने जाते। यही कारण है कि उन्हें संगठन के भीतर एक संतुलित और सर्व स्वीकार्य चेहरे के रूप में देखा जा रहा है। वे ‘संविधान बचाओ अभियान’ में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं और जमीनी स्तर पर पार्टी के कार्यक्रमों में भागीदारी निभाते रहे हैं। एससी समुदाय से आने वाले कर्मवीर सिंह बौद्ध को सामाजिक संतुलन के नजरिये से भी एक अहम दावेदार माना जा रहा है।
अब जानिये…बौद्ध को प्रत्याशी बनाने की बड़ी वजह
एससी समाज से, IPS पूरन केस के आंदोलन में अगुवा रहे
पहली, वे एससी समाज से हैं। दूसरा, वो हरियाणा सिविल सचिवालय में एडीओ रह चुके हैं। वो अनुसूचित समाज, वंचितों और कर्मचारियों की आवाज उठाने का काम करते रहे हैं। तीसरा, वो बीते साल हरियाणा की राजनीति में भूचाल ला देने वाले आईपीएस वाई पूरन कुमार सुसाइड केस में कथित आंदोलन के वे अगुवा रहे।
इनसे सबसे जरूरी बात यह रही कि वे काफी समय से राहुल गांधी की टीम के संपर्क में हैं। उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर भी राहुल के कार्यक्रमों की तस्वीरें दिखती हैं।
बौद्ध को राहुल तक हरियाणा के आईएएस ने पहुंचाया
कर्मबीर बौद्ध को राहुल गांधी तक पहुंचाने में हरियाणा के एक सीनियर आईएएस अधिकारी की अहम भूमिका बताई जा रही है। अभी ये अधिकारी एसीएस लेवल के हैं और एससी समाज से संबंध रखते हैं। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से इनके अच्छे संबंध हैं। उन्ही के जरिए बौद्ध की कांग्रेस में एंट्री कराई गई है। ये भी बताया जा रहा है कि इन आईएएस के परिवार में 22 के करीब आईएएस और पीसीएस अधिकारी है।
