- विधायक बोले-परंपरा तोड़ने की कोशिश हुई
कुरुक्षेत्र शहर में कांग्रेस विधायक अशोक अरोड़ा और भाजपा के पूर्व मंत्री सुभाष सुधा के समर्थकों की खींचतान दशहरा उत्सव पर भारी पड़ गई। शहर में 26 साल बाद फिर 2 दशहरा मेले और 2 जगह रावण दहन होने के हालात बन गए। कांग्रेस विधायक अशोक अरोड़ा की अगुवाई में शुक्रवार को पंजाबी धर्मशाला में हुई बैठक में अलग दशहरा मनाने का फैसला लिया गया।
इसके लिए सर्वजातीय दशहरा कमेटी बनाई जाएगी, जिसमें शहर के अलग-अलग समाज के लोग शामिल होंगे। हालांकि कुरुक्षेत्र दशहरा कमेटी ने दोनों पक्ष को साथ लाकर एक आयोजन कराने की कोशिश की। बातचीत में समर्थकों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था और यहां तक कि 2 स्टेज लगाने का विकल्प भी रखा गया, लेकिन सहमति नहीं बन सकी।
26 साल बाद अलग-अलग उत्सव
कुरुक्षेत्र में पहले 2 दशहरा कमेटी अलग-अलग आयोजन करती थीं, लेकिन विधायक अशोक अरोड़ा की कोशिश के बाद साल 2000 में दोनों कमेटियों को एक जगह इकट्ठा किया गया और शहर में एक दशहरा मनाने की शुरुआत हुई। लेकिन 26 साल बाद फिर से अलग-अलग कमेटी बन गईं।
परंपरा बदलने की कोशिश की गई
विधायक अरोड़ा के मुताबिक, कुरुक्षेत्र दशहरा कमेटी के बैनर तले स्थानीय विधायक को मुख्य अतिथि बनाने की परंपरा रही। उनके अनुसार पिछले 2 साल से इस परंपरा को बदलने की कोशिश की जा रही थी। इसी विवाद के चलते अब अलग आयोजन का फैसला करना पड़ा।
अरोड़ा ने कहा कि दशहरा सभी का पर्व है। नया आयोजन किसी एक जाति या वर्ग तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें सभी समाज के लोगों की भागीदारी होगी। साथ ही भगवान श्रीराम की भव्य शोभायात्रा भी निकाली जाएगी। नई कमेटी ब्रह्मसरोवर के पास मेला ग्राउंड में उत्सव मनाएगी, जबकि दूसरी कमेटी थीम पार्क में आयोजन करेगी।
सुधा बोले- मेला थीम पार्क में ही लगेगा
पूर्व मंत्री सुभाष सुधा ने कहा कि वह अलग-अलग नहीं, एक ही दशहरा उत्सव के पक्ष में हैं। उन्होंने दशहरा कमेटी से भी सभी पक्षों को सम्मान देने की बात कही थी। एक मंच पर समर्थकों के आमने-सामने बैठने से विवाद की आशंका थी। इसलिए बैठने की व्यवस्था अलग की जा सकती थी। यह व्यवस्था कैसे करनी है, इसका फैसला दशहरा कमेटी को करना था।
4 दिन में नहीं सुलझा मंच का विवाद
एक दशहरा उत्सव कराने के लिए चल रही बातचीत में मुख्य समस्या आयोजन की व्यवस्था को लेकर सामने आई। पूर्व मंत्री सुभाष सुधा की ओर से यह सुझाव दिया गया कि उत्सव एक ही रखा जाए, लेकिन दोनों पक्षों के समर्थकों को अलग बैठाया जाए। 2 स्टेज लगाने का विकल्प भी रखा गया, ताकि किसी तरह का विवाद न हो। लेकिन सहमति बन नहीं बन पाई।
अरोड़ा को संरक्षक बनाकर बनेगी नई कमेटी
अलग आयोजन के लिए बनाई जाने वाली सर्वजातीय दशहरा कमेटी के संरक्षक विधायक अशोक अरोड़ा होंगे। नई कमेटी अब आयोजन के लिए जगह और दूसरी व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन से संपर्क करेगी। सोमवार को प्रतिनिधिमंडल कुरुक्षेत्र DC से मिलकर दशहरा आयोजन के लिए जगह का आवेदन करेगी।
50 के दशक से जुड़ी रावण दहन की परंपरा
कुरुक्षेत्र में दशहरा मनाने की परंपरा कई दशक पुरानी है। बंटवारे के बाद पाकिस्तान से आए लोगों ने यहां रावण दहन की परंपरा को दोबारा शुरू किया था। बाद में शहर में दो अलग दशहरा मेले लगने लगे। लंबे समय तक यह व्यवस्था चली, फिर दोनों कमेटियां एक हो गईं।
हालांकि साल 2005 में पूर्व विधायक रमेश गुप्ता ने फिर से अलग-अलग आयोजन करवाया, लेकिन यह व्यवस्था केवल उसी साल तक रही। उसके बाद दोबारा एक कमेटी बनाकर थीम पार्क में आयोजन किया जाने लगा। अब प्रशासन के सामने दोनों आयोजन के लिए जगह, सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन की जिम्मेदारी होगी।
